Raisina Dialogue 2026: इस दशक में होंगे बड़े बदलाव, तकनीक और जनसांख्यिकी बदलेंगे दुनिया – बोले जयशंकर
नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण विचार रखे। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, कूटनीतिज्ञ और रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हुए, जहां वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और तकनीक से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और पुरानी वैश्विक व्यवस्था को हमेशा के लिए कायम रखना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में तकनीक और जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) दुनिया की शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकते हैं।
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👉 पूरी खबर पढ़ेंRaisina Dialogue 2026 में बदलती वैश्विक व्यवस्था पर बोले एस जयशंकर
अपने संबोधन के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव को रोकना असंभव है। उनके मुताबिक दुनिया लंबे समय तक किसी एक व्यवस्था में स्थिर नहीं रह सकती।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अक्सर 1945 के बाद की व्यवस्था या 1989 के बाद की व्यवस्था के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह मान लेना कि वही व्यवस्था हमेशा बनी रहेगी, वास्तविकता से दूर है।
जयशंकर ने इस सोच को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि दुनिया लगातार बदलती रहती है और नई शक्तियां उभरती रहती हैं। ऐसे में वैश्विक शक्ति संतुलन भी समय के साथ बदलना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि कई देशों ने लंबे समय तक अतीत की व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन बदलती परिस्थितियों को नजरअंदाज करने की वजह से कई नए कारकों को समझने में देर हुई।
भारत के इतिहास के संदर्भ में दिया अहम उदाहरण
एस जयशंकर ने अपने तर्क को समझाने के लिए भारत के इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, जबकि पिछले 70 साल भारत के इतिहास का केवल एक छोटा सा हिस्सा हैं।
उनके मुताबिक अगर कोई यह मान ले कि केवल यही दौर हमेशा के लिए कायम रहेगा, तो यह सोच सही नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि इतिहास हमें यह सिखाता है कि बदलाव ही स्थायी है और समय के साथ वैश्विक व्यवस्था भी बदलती रहती है। इसलिए देशों को भी अपनी रणनीतियों और नीतियों को समय के अनुसार ढालना चाहिए।
दुनिया तेजी से बन रही है मल्टीपोलर
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य की दुनिया पहले की तुलना में कहीं अधिक मल्टीपोलर (बहुध्रुवीय) होगी।
उनके मुताबिक अब ऐसा नहीं है कि कोई एक देश दुनिया के सभी क्षेत्रों में पूरी तरह प्रभुत्व रख सके।
उन्होंने कहा कि पहले के समय में कुछ देशों का वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति पर अधिक प्रभाव था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
जयशंकर के अनुसार, आने वाले समय में अलग-अलग क्षेत्र अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखाएंगे। उदाहरण के लिए:
- कोई देश तकनीक में आगे हो सकता है
- कोई देश आर्थिक शक्ति में मजबूत हो सकता है
- कोई देश सैन्य या रणनीतिक क्षेत्र में प्रभावी हो सकता है
इस तरह दुनिया में शक्ति का वितरण कई देशों के बीच होगा और यही मल्टीपोलर विश्व व्यवस्था का आधार बनेगा।
शक्ति का वितरण अब कई क्षेत्रों में फैल चुका है
जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में शक्ति का स्वरूप भी बदल रहा है। अब शक्ति केवल जीडीपी या सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं है।
आज के दौर में शक्ति के कई आयाम हैं, जैसे:
- तकनीकी क्षमता
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर
- आर्थिक ताकत
- जनसंख्या और मानव संसाधन
- कूटनीतिक प्रभाव
उन्होंने कहा कि दुनिया में अब शक्ति कई क्षेत्रों में फैल चुकी है और कोई भी देश सभी क्षेत्रों में पूरी तरह प्रभुत्व स्थापित नहीं कर सकता।
तकनीक और जनसांख्यिकी होंगे इस दशक के सबसे बड़े बदलाव
विदेश मंत्री ने कहा कि इस दशक में दो सबसे बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे –
1. तकनीक (Technology)
2. जनसांख्यिकी (Demography)
उन्होंने कहा कि नई तकनीकें जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर टेक्नोलॉजी और उन्नत संचार प्रणालियां वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल रही हैं।
तकनीक के कारण देशों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है और आर्थिक तथा रणनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं।
दूसरी ओर, जनसांख्यिकी भी एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभर रही है। जिन देशों की युवा आबादी अधिक है, उनके पास आर्थिक विकास और नवाचार के अधिक अवसर होंगे।
भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है क्योंकि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है।
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👉 पूरी खबर पढ़ेंअमेरिका में हो रहे बदलावों पर भी दिया संकेत
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि आज वैश्विक विश्लेषण का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका में हो रहे बदलावों पर केंद्रित रहता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को केवल एक देश पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उन सभी ताकतों को पहचानना होगा जो वैश्विक परिवर्तन को आगे बढ़ा रही हैं।
उनके मुताबिक, कई क्षेत्रीय शक्तियां और उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
भारत की भूमिका पर दिया महत्वपूर्ण संदेश
एस जयशंकर ने कहा कि भारत इस बदलती वैश्विक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
भारत की विदेश नीति अब केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई तकनीक, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक सहयोग पर भी आधारित है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनाथ सिंह बोले – समुद्र बन रहे हैं रणनीतिक शक्ति के केंद्र
इस कार्यक्रम के समानांतर कोलकाता में आयोजित मैरीटाइम कॉन्क्लेव ‘सागर संकल्प’ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी वैश्विक रणनीतिक स्थिति पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि पहले समुद्र को मुख्य रूप से व्यापार और परिवहन का माध्यम माना जाता था, लेकिन आज समुद्र रणनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बनते जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें सुरक्षित रखना सभी देशों की प्राथमिकता बन गया है।
बदल रही हैं पुरानी वैश्विक मान्यताएं
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और कई पुरानी मान्यताएं तथा वैश्विक व्यवस्थाएं टूट रही हैं।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता के कारण देशों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को भी समय के साथ बदलना होगा ताकि नई परिस्थितियों का सामना किया जा सके।
मिडिल ईस्ट के हालात ने बढ़ाई वैश्विक अनिश्चितता
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो घटनाएं हो रही हैं, वे बेहद असामान्य हैं और उनके परिणामों का अनुमान लगाना आसान नहीं है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और तनाव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे देशों को इन परिस्थितियों को समझते हुए अपनी रणनीतियों को तैयार करना होगा।
वैश्विक राजनीति के नए दौर की शुरुआत
रायसीना डायलॉग 2026 में दिए गए दोनों मंत्रियों के बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि दुनिया एक नए दौर की ओर बढ़ रही है।
जहां एक ओर तकनीकी क्रांति और जनसंख्या संरचना में बदलाव नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष नई चुनौतियां भी सामने ला रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन और भी जटिल हो सकता है, क्योंकि कई नए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभर रहे हैं।
भारत के लिए अवसर और चुनौतियां
बदलती वैश्विक व्यवस्था भारत के लिए अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आ सकती है।
एक ओर भारत की युवा आबादी, तकनीकी क्षमता और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था उसे वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति दे सकती है।
दूसरी ओर, वैश्विक संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से निपटना भी जरूरी होगा।
भारत की विदेश नीति और रणनीतिक सोच आने वाले वर्षों में इन चुनौतियों और अवसरों के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रहेगी।
Raisina Dialogue 2026 में विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान इस बात का संकेत देते हैं कि दुनिया एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।
तकनीक, जनसांख्यिकी और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकते हैं।
मल्टीपोलर दुनिया की ओर बढ़ते इस दौर में भारत भी अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला दशक वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।











