🌕 चंद्र ग्रहण 2026 – महत्वपूर्ण समय
Chandra Grahan 2026: सिंह समेत 5 राशियां रहें सावधान, जानें असर, उपाय और खास मान्यताएं
3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह दोपहर बाद शुरू होगा और शाम तक चलेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। चूंकि यह भारत में दृश्य रहेगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा और धार्मिक दृष्टि से इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है।
खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र में इसे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से जोड़ा जाता है। इस बार का ग्रहण कई राशियों के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है।
सिंह राशि पर रहेगा सबसे अधिक प्रभाव
चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जा सकता है।
- मानसिक तनाव बढ़ सकता है
- कार्यक्षेत्र में दबाव या विवाद की स्थिति बन सकती है
- वाहन चलाते समय विशेष सावधानी जरूरी
- प्रेम संबंधों में गलतफहमियां संभव
सिंह राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि में क्रोध पर नियंत्रण रखें। अनावश्यक बहस या जोखिम भरे निर्णय से बचें। सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें।
उपाय: भगवान विष्णु या शिव मंत्र का जाप करें। सफेद वस्त्र, चावल या दूध का दान शुभ माना गया है।
इन राशियों को भी रहना होगा सतर्क
सिंह के अलावा मेष, कर्क, मकर और मीन राशि के जातकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मेष राशि
- आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव
- निवेश सोच-समझकर करें
- अनावश्यक खर्च से बचें
कर्क राशि
- भावनात्मक अस्थिरता
- स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
- परिवार में मतभेद
मकर राशि
- कार्यस्थल पर तनाव
- वरिष्ठों से टकराव
- निर्णय लेने में भ्रम
मीन राशि
- रिश्तों में दूरी या गलतफहमी
- मानसिक असमंजस
- अचानक खर्च बढ़ने की आशंका
इन राशियों के लिए सलाह है कि ग्रहण काल में शांत रहें, सकारात्मक सोच बनाए रखें और कोई बड़ा निर्णय टाल दें।
इन राशियों के लिए शुभ संकेत
वृषभ, मिथुन और तुला राशि के लिए यह ग्रहण अपेक्षाकृत सकारात्मक परिणाम ला सकता है।
- करियर में उन्नति
- मेहनत का फल
- अचानक धन लाभ के योग
- पारिवारिक जीवन में सुखद वातावरण
बाकी राशियों पर इसका मिला-जुला प्रभाव रहने की संभावना है।
ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें
ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान कुछ सावधानियां बरतने की परंपरा है।
क्या करें
✔ मंत्र जाप और ध्यान करें
✔ ईश्वर का स्मरण करें
✔ जरूरतमंदों को दान दें
✔ ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें
✔ घर में गंगाजल का छिड़काव करें
क्या न करें
✘ सूतक काल में भोजन पकाने से बचें
✘ मूर्तियों का स्पर्श न करें
✘ कोई नया या शुभ कार्य प्रारंभ न करें
✘ गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें
दान में विशेष रूप से चावल, चीनी, दूध, मोती और सफेद वस्त्र लाभकारी माने गए हैं।
सूतक काल और मंदिरों में बदलाव
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले लग जाता है। इस बार यह सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा।
सूतक लगते ही अधिकांश मंदिरों में पूजा-पाठ रोक दिया जाता है। कपाट बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद ही पुनः दर्शन शुरू होते हैं।
कई स्थानों पर सुबह की आरती के बाद मंदिर बंद कर दिए जाएंगे और शाम को ग्रहण समाप्ति के बाद ही खोले जाएंगे।

एक रहस्यमयी परंपरा: जहां ग्रहण में भी बंद नहीं होते कपाट
राजस्थान के बीकानेर में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर है जहां चंद्र ग्रहण के दौरान भी कपाट बंद नहीं किए जाते।
मान्यता है कि एक बार ग्रहण काल में मंदिर बंद कर दिया गया था और भगवान को समय पर भोग नहीं लगाया गया। उसी रात पास के एक हलवाई को स्वप्न में भगवान ने दर्शन दिए और भूख लगने की बात कही। इसके बाद से परंपरा बन गई कि ग्रहण काल में भी यहां नियमित पूजा और भोग जारी रहेगा।
यह मंदिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। ऐतिहासिक रूप से यह बीकानेर के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। लाल पत्थर और संगमरमर से निर्मित यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और कलात्मक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
अन्य मंदिर जहां ग्रहण में भी जारी रहती है पूजा
देश में कुछ अन्य प्रमुख मंदिर भी हैं जहां ग्रहण काल में कपाट बंद नहीं किए जाते।
- उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर – मान्यता है कि यहां विराजमान भगवान महाकाल पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता।
- दिल्ली का कालकाजी मंदिर – यहां ग्रहण काल में भी पूजा जारी रहती है।
- गया का विष्णुपद मंदिर – यहां पिंडदान प्रक्रिया ग्रहण में भी चलती रहती है।
- उत्तराखंड का कल्पेश्वर मंदिर – यहां भी कपाट बंद नहीं होते।
- केरल का थिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर – यहां भगवान को ग्रहण में भी भोग लगाया जाता है।
इन मंदिरों की मान्यताएं अलग-अलग हैं, लेकिन सभी में एक समान विश्वास है कि यहां विराजमान देवता पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
कानपुर में 48 मिनट का प्रभाव
कुछ शहरों में ग्रहण का प्रभाव सीमित समय के लिए रहेगा। उदाहरण के तौर पर, कानपुर में चंद्रमा के उदय के कारण ग्रहण का दृश्य प्रभाव लगभग 48 मिनट तक ही रहेगा।
ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। चंद्रोदय के समय के कारण कई जगहों पर इसका प्रभाव कम समय तक दिखाई देगा।
ज्योतिष और विज्ञान: दो दृष्टिकोण
जहां विज्ञान इसे एक सामान्य खगोलीय घटना मानता है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में इसे मानसिक और ऊर्जात्मक बदलाव से जोड़ा जाता है।
वैज्ञानिक रूप से यह पृथ्वी की छाया का परिणाम है।
धार्मिक रूप से इसे राहु-केतु के प्रभाव से जोड़ा जाता है।
दोनों दृष्टिकोण अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। व्यक्ति की आस्था के अनुसार इसका महत्व तय होता है।
निष्कर्ष
3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण कई मायनों में विशेष है। सिंह राशि में लगने के कारण इसका ज्योतिषीय महत्व बढ़ गया है। जहां कुछ राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, वहीं कुछ के लिए यह शुभ संकेत भी दे रहा है।
सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू होगा और ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:48 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी, मंत्र जाप और दान पुण्य करने से इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
आस्था और विज्ञान के इस संगम में सबसे महत्वपूर्ण है संतुलन और सकारात्मक सोच। ग्रहण को भय नहीं, बल्कि सजगता और आत्मचिंतन का अवसर मानें।












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